राष्‍ट्रीय

सम्राट चौधरी की पहल: शिक्षा और अधोसंरचना में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का विस्तार

पटना

 बिहार में सत्ता की बागडोर संभालने के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाजपा के आस्था और अध्यात्म के कोर एजेंडा को सर्वोपरि मान योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

इसी कड़ी में उन्होंने गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर निर्माणाधीन पुल का नामकरण गंगा-अंबिका पथ करने की घोषणा की है।
भाजपा के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की राह पर अग्रसर हाेते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरस्वती शिशु मंदिर की तर्ज पर सरस्वती विद्या निकेतन स्कूल खोलने मन बनाए हैं

सरस्‍वती विद्या निकेतन बनेगा मॉडल स्‍कूल
इन विद्यालयाें में आधुनिक दौर के निजी स्कूलों से बेहतर व्यवस्था होगी। एक तरह से ये माॅडल स्कूल होंगे। दरअसल, भाजपा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे समय से भारतीय सांस्कृतिक विरासत, आस्था और शिक्षा के क्षेत्र में वैचारिक हस्तक्षेप को अपने प्रमुख एजेंडे के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं।

ऐसे में सम्राट चौधरी की हालिया पहलें इसी व्यापक राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण का हिस्सा मानी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर निर्माणाधीन नए पुल का नाम गंगा-अंबिका पथ रखने की घोषणा को केवल नामकरण भर नहीं माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बिहार के सार्वजनिक स्थलों और अधोसंरचना परियोजनाओं को सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान से जोड़ने की कोशिश का हिस्सा है।

भाजपा लंबे समय से विकास एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के समन्वय की राजनीति करती रही है और सम्राट चौधरी उसी सूत्र को बिहार में आगे बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं।

इसी क्रम में सरकार की ओर से सरस्वती विद्या निकेतन नाम से नए विद्यालयों की स्थापना की तैयारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बताया जा रहा है कि इन विद्यालयों की अवधारणा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों के माॅडल से प्रभावित होगी।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे मॉडल स्‍कूल
हालांकि इन्हें आधुनिक शिक्षा, अत्याधुनिक संसाधनों और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं से लैस करने की योजना है, ताकि ये निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्यालयों को भी चुनौती दे सकें।

स्वयं मुख्यमंत्री यह घोषणा कर चुके हैं कि स्कूल ऐसे होंगे कि अधिकारी एवं प्रतिष्ठित लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सिफारिश करेंगे।

सरकार की सोच है कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्ति का माध्यम न होकर भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों से भी जुड़ी हो।

इसी कारण इन प्रस्तावित विद्यालयों में आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कार आधारित शिक्षा तथा स्थानीय सांस्कृतिक विरासत पर विशेष बल दिए जाने की संभावना है।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो सम्राट चौधरी का यह कदम भाजपा के परंपरागत समर्थक वर्ग को मजबूत संदेश देने वाला माना जा रहा है।

बिहार में भाजपा लंबे समय से सांस्कृतिक और वैचारिक मुद्दों को विकास के एजेंडे के साथ जोड़ने की कोशिश करती रही है।

सावरकर पर पाठ्यक्रम लागू करने की घोषणा
मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी इन प्रयासों को सरकारी योजनाओं और संस्थागत ढांचे के माध्यम से नई गति देना चाहते हैं।

वीर विनायक दामोदर सावरकर पर शोध उपरांत पाठ्यक्रम में लागू करने, आदिवासी क्षेत्र में मैराथन कराने के साथ विजेताओं को एक लाख रुपये, 75 हजार रुपये एवं 50 हजार रुपये देने की घोषणा दूरगामी रणनीति है।

विपक्ष इस तरह की घोषणाओं को वैचारिक एजेंडे के विस्तार के रूप में देख सकता है, लेकिन भाजपा इसे भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में आवश्यक कदम बता रही है।

पार्टी नेताओं का तर्क है कि देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं के अनुरूप संस्थानों और परियोजनाओं का नामकरण होते रहे हैं, इसलिए बिहार में भी ऐसी पहल स्वाभाविक है।

मुख्यमंत्री के कदम इस बात का संकेत दे रहे हैं कि वे बिहार में केवल प्रशासनिक उपलब्धियों के आधार पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक पहचान के माध्यम से भी अपनी अलग राजनीतिक छाप छोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button