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क्या फिर लौट रहा कोरोना? आंध्र प्रदेश के बाद महाराष्ट्र में 3 साल बाद मिले 21 नए केस, जानिए कैसी है स्थिति

पुणे

कोरोना वायरस (Covid-19) ने करीब तीन साल की शांति के बाद महाराष्ट्र में एक बार फिर से दस्तक दी है। राज्य में विशेषकर पुणे शहर में पिछले 10 दिनों के भीतर कोविड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। हालांकि, राहत की बात यह है कि ज्यादातर मामले हल्के लक्षणों वाले हैं और स्वास्थ्य विभाग या विशेषज्ञों को फिलहाल किसी नई लहर का कोई संकेत नहीं दिखा है।

आंकड़ों में कोरोना की वापसी
राज्य स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में इस साल अब तक कोविड-19 के 48 मामले सामने आ चुके हैं। गनीमत यह रही है कि इनमें से किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। लगभग तीन वर्षों तक यह वायरस रडार से बाहर रहा, लेकिन साल 2026 में इसके मामलों में धीरे-धीरे वृद्धि देखी जा रही है। इस साल जनवरी में 3, फरवरी में 1, जून में 11 और अब तक जुलाई में 21 मामले दर्ज किए गए हैं।

रूटीन टेस्ट में नहीं, दूसरी बीमारियों की जांच में आ रहे पकड़ में
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, ज्यादातर पॉजिटिव केस नियमित कोविड टेस्टिंग के दौरान नहीं मिल रहे हैं। ये मामले तब सामने आ रहे हैं जब मरीज किसी अन्य बीमारी के लिए डॉक्टर की सलाह पर जांच करा रहे हैं या फिर किसी सर्जरी से पहले उनका प्री-ऑपरेटिव फिटनेस टेस्ट किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस अब इन्फ्लूएंजा की तरह बर्ताव कर रहा है। लोगों में इम्युनिटी कम होने और नए वेरिएंट के उभरने के कारण हर एक-दो साल में इसके मामलों में इस तरह का उछाल आना स्वाभाविक है।

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स?
जहांगीर अस्पताल के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष चौधरी ने बताया कि 2023 के बाद यह पहली बार है जब कोविड के मामलों में इतनी स्पष्ट वृद्धि देखी गई है। पिछले 8 से 10 दिनों में कोविड और इन्फ्लूएंजा दोनों के मरीज बढ़े हैं। उन्होंने कहा, "अकेले हमारे अस्पताल में ही पिछले कुछ दिनों में 7 से 8 कोविड केस देखे गए हैं। अगर एक अस्पताल में इतने मामले हैं, तो पूरे शहर में ऐसे कई और मामले होने की आशंका है।"

डॉ. चौधरी के अनुसार, मौजूदा संक्रमण ओमिक्रॉन वेरिएंट से भी हल्का है। मरीजों में आमतौर पर खांसी, जुकाम, गले में खराश और थकान जैसे लक्षण दिख रहे हैं, जो 3 से 5 दिनों तक रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय में संक्रमण का वास्तविक आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि हल्के लक्षण वाले बहुत से लोग टेस्ट ही नहीं कराते। उन्होंने लोगों को आगाह किया कि कोविड अब इन्फ्लूएंजा की तरह हमारे बीच ही रहने वाला है, इसलिए सावधानी जरूर बरतें और लापरवाही न करें।

घबराने की जरूरत नहीं, कोई नई लहर नहीं
डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा स्थिति किसी 'कोविड लहर' जैसी बिल्कुल नहीं है। पहले टेस्टिंग कम होने की वजह से छिटपुट मामलों पर ध्यान नहीं गया। अब चूंकि अन्य रेस्पिरेटरी वायरल इन्फेक्शन बढ़ रहे हैं, इसलिए अस्पतालों में 'अपर रेस्पिरेटरी पैनल' का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है, जिससे कोरोना के केस भी पकड़ में आ रहे हैं।

आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस के 12 मामले, चार लोगों की मौत
इससे पहले आंध्र प्रदेश में 26 जून से 16 जुलाई के बीच कोविड के 12 मामले सामने आए हैं, जिनमें से चार लोगों की मौत हुई है। राज्य के स्वास्थ्य सचिव वीरपांडियन ने गुरुवार को बताया कि 26 जून से 16 जुलाई के बीच कोरोनावायरस से चार लोगों की मौत हुई है। इनमें से तीन मामले कडप्पा जिले से और एक मामला काकीनाडा जिले से था। ये चारों लोग पहले से ही गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे और कोविड से संक्रमित थे।

इस साल कोविड का पहला मामला 26 जून को कडप्पा जिले में सामने आया था, जबकि एक जुलाई से 16 जुलाई के बीच 11 और लोगों में कोविड की पुष्टि हुई। अकेले कडप्पा जिले में कोरोनावायरस के आठ मामले दर्ज किए गए। गुंटूर जिले में दो मामले और विशाखापत्तनम व काकीनाडा जिलों में एक-एक मामला दर्ज किया गया। इन पांच लोगों के स्वाब के नमूने जांच के लिए पुणे स्थित नेशनल वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट भेजे गए थे।

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