राष्‍ट्रीय

बिहार में नए कारखानों के लिए पंजीकरण शुल्क तय, देरी पर बढ़ेगा शुल्क

पटना
बिहार में कल-कारखानों के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क तय कर दिया गयाा है। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने बिहार में नए कल-कारखाना खोलने वालों के लिए पंजीकरण शुल्क तय किया है। इसके तहत बिहार में अब नए कारखाना खोलने पर संचालकों को मामूली शुल्क देना होगा। इसके बाद तीन महीने, छह महीने तक उससे दस गुना तक शुल्क देना होगा। छह महीने के बाद पंजीकरण के लिए आवेदन करने वालों को 20 गुना अधिक शुल्क देना होगा। विभाग ने न्यूनतम 500 और अधिकतम 80 हजार पंजीयन शुल्क तय किया है। विभाग की ओर से उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता नियमावली 2026 बनाई गई है। खुदरा या थोक विक्रेताओं का कारोबार करने वालों पर यह नियम लागू होगा।

पहले से कारोबार करने वालों ने अगर पंजीकरण नहीं कराया है या नए कारोबार शुरू कर रहे हैं तो उनको अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। ऑनलाइन आवेदन में अगर आवेदन में कोई गड़बड़ी नहीं है तो फिर अविलंब पंजीकरण जारी कर दिया जाएगा। लेकिन अपूर्ण आवेदन होने पर सात दिनों के भीतर आवेदनकर्ताओं से संपर्क कर अनिवार्य रूप से दुकानों या कारखानों का पंजीकरण कर दिया जाएगा। पंजीयन अधिकारी पंजीकरण में सहूलियत प्रदान करेगा और केवल सतही कारणों के आधार पर किसी भी कीमत में आवेदन को अस्वीकार नहीं करेगा।

पंजीकरण प्रमाण पत्र अहस्तांतरणीय होगा और उसे अपने दुकान-कारखानों में संचालकों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा। पहले से पंजीकृत नियोक्ताओं को भी ऑनलाइन पोर्टल पर पूरी जानकारी देनी होगी। गलत जानकारी देकर प्राप्त किया गया कोई भी पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। वहीं जिसका व्यवसाय बंद होने के कगार पर है वह ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण निरस्तीकरण को आवेदन कर सकता है।

181 दिनों से अधिक होने पर 50 हजार देना होगा
वहीं 301 से 500 तक कामगार रखने वालों को 60 दिनों के भीतर तीन हजार, 61 से 90 दिनों तक छह हजार, 91 से 180 दिनों तक 30 हजार तो 181 दिनों से अधिक होने पर 50 हजार देना होगा। 501 से लेकर एक हजार तक कामगार रखने वालों को 60 दिनों तक चार हजार, 61 से 90 दिनों तक आठ हजार, 91 से 180 दिनों तक 40 हजार तो 181 दिनों से अधिक होने पर 60 हजार देना होगा। 1001 से पांच हजार तक कामगार रखने वाले संचालकों को 60 दिनों के भीतर पांच हजार, 61 से 90 दिनों तक 10 हजार, 91 से 180 दिनों तक 50 हजार तो 181 दिनों से अधिक होने पर 70 हजार शुल्क देना होगा।

कब कितना जुर्माना लगेगा
नियमावली के तहत यह प्रावधान किया गया है कि संहिता की लागू होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर पंजीकरण के लिए आवेदन करता है तो 10 से लेकर 49 तक कामगार रखने वाले कारोबारियों को मात्र 500 रुपए शुल्क देना होगा। 61 दिनों से 90 दिनों तक एक हजार, 91 से 180 दिनों तक पांच हजार जबकि 181 दिन से अधिक होने पर 10 हजार शुल्क देना होगा। 50 से लेकर 100 तक के कामगार रखने वाले संचालकों को 60 दिनों की अवधि में एक हजार, 61 से 90 दिनों तक दो हजार, 91 से 180 दिनों तक 10 हजार तो 181 दिनों से अधिक होने पर 20 हजार शुल्क लगेगा। 101 से 300 तक कामगार रखने वाले संचालकों को 60 दिनों के भीतर दो हजार, 61 से 90 दिनों तक चार हजार, 91 से 180 दिनों तक 20 हजार तो 181 दिनों से अधिक होने पर 40 हजार पंजीयन शुल्क देना होगा।

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