अंतर्राष्ट्रीय

ट्रंप की ईरान को चेतावनी, हत्या की साजिश पर विनाशकारी जवाब की धमकी

नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच जारी तनाव एक बेहद खतरनाक और अभूतपूर्व मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी सेना को 'स्टैंडिंग ऑर्डर्स' दे रखे हैं कि अगर ईरान उनकी हत्या की साजिश को अंजाम देता है, तो तेहरान पर अब तक का सबसे बड़ा और विनाशकारी पलटवार किया जाए।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान की तरफ से उन्हें "जान से मारने या हत्या के प्रयास" की लगातार धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 1,000 मिसाइलें "पूरी तरह से तैयार" हैं और उनका रुख ईरान की तरफ है। अगर ईरान ने कोई भी हिमाकत की, तो हजारों और मिसाइलें पीछे से दाग दी जाएंगी।

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों और अमेरिकी संविधान के मुताबिक, ट्रंप का यह दावा व्यावहारिक और कानूनी रूप से संभव नहीं है। अमेरिकी कानून में किसी भी ऑटोमेटिक या पहले से अधिकृत "डैड मैन्स स्विच" का कोई प्रावधान नहीं है, जो राष्ट्रपति की मौत होते ही सेना को अपने आप युद्ध शुरू करने का अधिकार दे दे।

राष्ट्रपति की मौत के बाद क्या होता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा प्रणाली में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जहां राष्ट्रपति की गैर-मौजूदगी में कोई कंप्यूटर या पूर्व-लिखित आदेश सीधे परमाणु या मिसाइल हमले शुरू कर दे।

अगर राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या होती है, तो अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन और 'प्रेसिडेंशियल सक्सेशन एक्ट 1947' के तहत राष्ट्रपति की शक्तियां तत्काल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पास चली जाएंगी।

नए कमांडर-इन-चीफ के रूप में यह पूरी तरह जेडी वेंस पर निर्भर करेगा कि वे ट्रंप के आदेशों को लागू करते हैं, उनमें बदलाव करते हैं या उन्हें पूरी तरह खारिज कर देते हैं।

इतिहासकार और लेखक गैरेट एम. ग्रैफ ने कहा, "अमेरिका ने कई तरह के कारणों से कभी भी तकनीकी 'डैड मैन्स स्विच' का उपयोग नहीं किया है।"

ग्रैफ के मुताबिक, अमेरिका के पास आपातकालीन स्थितियों और परमाणु हमलों से निपटने के लिए बेहद विस्तृत 'कंटिन्यूटी-ऑफ-गवर्नमेंट' (सरकार चलाने की निरंतरता) की योजनाएं जरूर हैं, लेकिन वे योजनाएं भी राष्ट्रपति की मौत के बाद किसी भी स्वचालित सैन्य कार्रवाई की अनुमति नहीं देती हैं।

ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने खाई बदले की कसम
ट्रंप के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने का संकल्प दोहराया। बता दें कि अयातुल्ला अली खामेनेई इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए थे, जिसके बाद यह युद्ध शुरू हुआ था।

मोजतबा खामेनेई ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, "हम इस आपराधिक और अपमानजनक हत्यारों से अपने पिता और दोनों युद्धों के सभी शहीदों के पवित्र खून का बदला लेने की कसम खाते हैं। यह बदला हमारे देश की इच्छा है और इसे निश्चित रूप से पूरा किया जाएगा।"

ईरान में इस हफ्ते हुए अंतिम संस्कार के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत के नारे वाले पोस्टर और बैनर भी देखे गए।

ट्रंप को निशाना बनाने की नई साजिश, सुरक्षा में बदलाव
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों को ट्रंप को निशाना बनाने की ईरान की नई और बेहद गंभीर साजिशों के बारे में अलर्ट किया है। खुद ट्रंप ने तुर्की में हुए नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान इन खतरों का जिक्र करते हुए कहा था, "वे अमेरिकी नेता— यानी मुझे, रास्ते से हटाना चाहते हैं।"

सुरक्षा को लेकर चिंताएं क्यों बढ़ीं?
राष्ट्रपति ट्रंप इस हफ्ते तुर्की से वापस लौटते समय कतर द्वारा उपहार में दिए गए नए अत्याधुनिक विमान के बजाय एक पुराने 'एयर फोर्स वन' (Air Force One) विमान से यात्रा करते दिखे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 400 मिलियन डॉलर के रेनोवेशन के बावजूद नए कतरी विमान में कुछ ऐसे मिसाइल डिटेक्शन और काउंटर-मेजर (मिसाइल रोधी) सिस्टम नहीं थे, जो पुराने विमानों में मौजूद हैं। सुरक्षा कारणों से यह बड़ा समझौता माना जा रहा है।

यह सुरक्षा चिंताएं ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका और ईरान ने एक बार फिर एक-दूसरे पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पिछले महीने हुआ युद्धविराम समझौता पूरी तरह से टूटने की कगार पर पहुंच गया है।

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