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सुनेउंग परीक्षा सिस्टम से तुलना, भारत में भी बेहतर परीक्षा व्यवस्था की उठी मांग

NEET UG 2026 री-एग्जाम के बाद दक्षिण कोरिया के सुनेउंग डे की चर्चा भारत में भी तेज हो गई है. इसकी वजह यह है कि री-नीट परीक्षा के दिन कई छात्र विभिन्न कारणों से परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचे और उन्हें प्रवेश नहीं मिल सका. इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोग दक्षिण कोरिया की परीक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए सवाल उठा रहे हैं कि क्या भारत में भी छात्रों की सुविधा के लिए ऐसी विशेष व्यवस्थाएं की जानी चाहिए. दरअसल, सुनेउंग दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा है, जिसे देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में गिना जाता है. इस परीक्षा के दिन सरकार और प्रशासन विशेष इंतजाम करते हैं. ट्रैफिक कम रखने के लिए कई ऑफिस देर से खुलते हैं, सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बढ़ाई जाती हैं, पुलिस देर से पहुंचने वाले छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में मदद करती है.

इसी वजह से NEET और सुनेउंग की तुलना की जा रही है. कई लोगों का मानना है कि भारत में भी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं के दौरान ट्रैफिक मैनेजमेंट, अतिरिक्त परिवहन सुविधा और छात्रों की सहायता के लिए विशेष व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि कोई अभ्यर्थी केवल देरी के कारण अपने भविष्य को प्रभावित होते न देखे.  

एक साल हो जाता है खराब
बता दें कि कहीं ट्रैफिक तो कहीं अन्य कारणों की वजह से उम्मीदवारों को एग्जाम सेंटर पर देर से पहुंचने की वजह से परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिला जिसके कारण उनका एक साल बर्बाद हो गया. अब उन्हें दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए एक साल का इंतजार करना होगा. लेकिन साउथ कोरिया में ऐसा नहीं है. माना जाता है कि वहां पर एक हेल्पलाइन नंबर होता है जिसपर उम्मीदवार फोन कर सकते हैं अगर वे परीक्षा के लिए लेट हो रहे होते हैं. कंस्ट्रक्शन साइट का काम रोक दिया जाता है. यहां तक की शेयर बाजार भी देर से खुलते हैं ताकि छात्रों को किसी तरह को कोई परेशानी न हो.

बंद रहती हैं दुकाने, देर से खुलते हैं शेयर बाजार
दक्षिण कोरिया में हर साल नवंबर के महीने में इस परीक्षा का आयोजन होता है और उस एक दिन पूरे देश में सन्नाटा होता है. हर दुकान पर ताले लग जाते हैं, निर्माण काम थम जाता है. विमान उड़ान नहीं भरते हैं. इतनी ही नहीं इस खास दिन शेयर बाजार भी लेट से खुलते हैं.

क्या है सुनेउंग?
  बता दें कि दक्षिण कोरिया में हर साल नवंबर के महीने में एक खास दिन सुनेउंग डे के नाम से जाना जाता है. ये कोरियाई भाषा में होने वाले कॉलेज स्‍कोलास्टिक एबिलिटी टेस्‍ट यानी सीएसएटी या सी-सैट को कहते हैं. इस परीक्षा में हर साल लाखों उम्मीदवार हिस्सा लेते हैं. ये बैक-टू-बैक होने वाली 9 घंटे की मैराथन परीक्षा होती है. ऐसे में छात्रों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो इसके लिए कई कदम उठाए जाते हैं.

पुलिस करती है परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में मदद
ये कोई छोटी-मोटी परीक्षा नहीं है बल्कि छात्रों का भविष्य भी तय करता है. ऐसे में इस दिन सड़कों पर केवल सायरन की आवाजें आती हैं. पुलिस की गाड़ियां भी छात्रों को परीक्षा केंद्र पर पहुंचाने में मदद करती हैं. इस दिन कोरिया में हर ओर शांति का माहौल इसलिए बनाया जाता है ताकि छात्रों को किसी भी तरह की डिस्टरबेंस न हो.

भारत भी अपना सकता है ये नियम
दक्षिण कोरिया के सुनेउंग (CSAT) मॉडल से यह जरूर सीख ली जा सकती है कि बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं के दौरान छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए. भारत में भी NEET जैसी परीक्षाओं के समय ट्रैफिक मैनेजमेंट, सार्वजनिक परिवहन में अतिरिक्त व्यवस्था और समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचाने के लिए बेहतर इंतजाम किया जा सकता है. हालांकि, भारत की जनसंख्या और परीक्षा केंद्रों की संख्या दक्षिण कोरिया से काफी अधिक है. ऐसे में वहां जैसा पूरा सिस्टम लागू करना आसान नहीं होगा. फिर भी कुछ कदम जैसे विशेष बस सेवाएं, पुलिस सहायता और परीक्षा वाले दिन ट्रैफिक कंट्रोल भारत में व्यावहारिक रूप से अपनाए जा सकते हैं.

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