मध्‍यप्रदेश

कपिल सिब्बल के शामिल होने के बाद राजेंद्र भारती केस में तेजी, विधायकी पर सस्पेंस

दतिया
मध्य प्रदेश के दतिया के पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती से जुड़े 27 वर्ष पुराने एफडी हेराफेरी मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने त्वरित सुनवाई की याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई निर्धारित की है। न्यायालय ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसे प्राथमिकता से सूचीबद्ध किया, हालांकि शासन पक्ष की ओर से समय की मांग किए जाने के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

जानकारी के अनुसार, राजेंद्र भारती की ओर से 4 मई को शीघ्र सुनवाई हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसे 6 मई को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में रखा गया। इससे पूर्व मामले की नियमित सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तिथि निर्धारित थी, लेकिन याचिकाकर्ता पक्ष द्वारा जल्द सुनवाई की मांग के चलते यह बदलाव हुआ। पूर्व विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखते हुए अदालत से मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया और याचिका को शीघ्र सूचीबद्ध करने की मांग की।

एफडी हेराफेरी मामले में दोष सिद्ध
यह मामला वर्ष 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में की गई 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक के तत्कालीन पदाधिकारियों के साथ मिलकर एफडी की अवधि में अनियमित परिवर्तन कर फर्जी तरीके से ब्याज निकाला गया। इस प्रकरण में दिल्ली की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।कोर्ट ने उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी सहित विभिन्न धाराओं में दोष सिद्ध किया है। सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी समान धाराओं में सजा सुनाई गई है।

राजनीतिक और कानूनी स्थिति पर असर
सजा के बाद विधानसभा द्वारा राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त कर दतिया सीट को रिक्त घोषित किया जा चुका है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाती है। हालांकि, यदि हाईकोर्ट से सजा पर स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त होता है, तो उनकी राजनीतिक स्थिति पर पुनर्विचार संभव है। इस बीच, उनके पुत्र अनुज भारती ने जानकारी दी है कि फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील और जमानत के लिए आवेदन दायर किया जाएगा।

मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल
इस पूरे प्रकरण के बाद दतिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यदि हाईकोर्ट में राहत नहीं मिलती, तो दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।

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