राष्‍ट्रीय

हाईकोर्ट ने हिरासत में मौत मामले में सरकार को लगाई फटकार, 5 मई तक दस्तावेज पेश करने का आदेश

 रांची

 हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत में हिरासत में कथित यातना और मौत के मामले में दाखिल याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जेल से युवक के स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।

कहा गया कि जेल अधीक्षक के सेवानिवृत्त होने के कारण युवक के स्वास्थ्य से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सका है। उसे मंगवाने के लिए समय चाहिए। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते करते हुए मौखिक कहा कि दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बहाना नहीं बनाएं। अगर दस्तावेज ही प्रस्तुत करना था तो आज क्यों नहीं किया गया?

अदालत ने 5 मई तक हर हाल में दस्तावेज पेश करने को कहा है। यदि दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया तो जेल आइजी और गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। मामले में सीजेएम पलामू ने मृतक युवक के खिलाफ दर्ज केस का मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत किया गया।

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात सामने आई थी कि युवक को रिमांड पर लेने के लिए पलामू सीजेएम कोर्ट के यहां अस्पताल का प्रमाण पत्र दिया गया था उसमें कस्टडी के लिए फिट लिखा हुआ था, जिसके आधार पर पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया था। लेकिन सरकार के शपथ पत्र में छह मार्च 2025 को युवक का एक अन्य फिटनेस से संबंधित कागजात है, जिसमें युवक को घायल बताया गया है।

कोर्ट ने इसको गंभीरता से लिया और सीजेएम पलामू से युवक के केस का मूल रिकार्ड मांगा था। प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया था कि एक मार्च 2025 को युवक महफूज अहमद को नवाबाजार में पुलिस पकड़ कर ले गई थी। हिरासत में लेकर उसके साथ मारपीट की गई।

बाद में उसके खिलाफ पांकी थाना में केस दर्ज कर सीजेएम कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया। उस दौरान सीजेएम कोर्ट में पुलिस ने अस्पताल का एक सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत किया था ,जिसमें युवक के घायल होने के बाद भी उसे फिट फार कस्टडी बताया गया था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button