छत्‍तीसगढ़

खनन माफिया पर सख्त एक्शन: सीमा लांघने पर 4 पोकलेन मशीनें जब्त

आरंग.

रेत के अवैध कारोबार पर लगाम कसने के लिए खनिज विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है. कलेक्टर के सख्त निर्देश और उप संचालक (खनिज) राजेश मालवे के मार्गदर्शन में विभाग ने आरंग क्षेत्र में चल रहे अवैध उत्खनन के नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है.

लगातार मिल रही शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए सहायक खनिज अधिकारी उमेश भार्गव के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. टीम ने आज तड़के सुबह जब आरंग ब्लॉक के ग्राम चिखली और कुरूद में अचानक दबिश दी, तो वहां का नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए. अंधेरे का फायदा उठाकर स्वीकृत खदान क्षेत्र की सीमाओं को लांघकर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किया जा रहा था. विभाग की टीम को देखते ही मौके पर भगदड़ मच गई, लेकिन टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी की और अवैध कार्य में लगी 4 भारी-भरकम पोकलेन मशीनों को जब्त कर लिया.
नियमों की धज्जियां : खदानों में रात के समय उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर काम जारी था.
सीमाओं का उल्लंघन : उत्खनन स्वीकृत क्षेत्र (Lease Area) के बाहर किया जा रहा था, जो सीधे तौर पर राजस्व की चोरी है.
मशीनों की जब्ती : मौके पर ही चारों पोकलेन मशीनों को सीलबंद कर दिया गया है.
सख्त चेतावनी : संबंधित पट्टेदारों (Lease Holders) के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

अब होगी खदानों की ‘सर्जिकल पैमाइश’
विभागीय सूत्रों के अनुसार, केवल जब्ती ही काफी नहीं है. अब प्रशासन इन खदानों का पुनः सीमांकन (Demarcation) करने जा रहा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कोई भी पट्टेदार अपनी निर्धारित सीमा से बाहर जाकर प्रकृति और राजस्व को नुकसान न पहुंचा सके. खनिज अधिकारी उमेश भार्गव ने बताया कि अवैध उत्खनन के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है. चिखली और कुरूद में हुई यह कार्रवाई केवल शुरुआत है. जिले के अन्य क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है और अनियमितता पाए जाने पर पट्टा निरस्त करने जैसी कठोर कार्रवाई से भी हम पीछे नहीं हटेंगे.

खनिज विभाग की इस तत्परता ने अवैध रेत कारोबारियों के बीच खौफ पैदा कर दिया है. स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन के इस कदम की सराहना की है, क्योंकि अवैध उत्खनन से न केवल पर्यावरण को क्षति पहुंच रही थी, बल्कि भारी वाहनों की आवाजाही से गांव की सड़कें भी जर्जर हो रही थीं.

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