खेल संसार

चैंपियंस लीग,एटलेटिको मैड्रिड ने बार्सिलोना को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई

नई दिल्ली

 यूईएफए चैंपियंस लीग क्वार्टर फाइनल में बार्सिलोना का सफर खत्म हो गया। दूसरे लेग में शानदार शुरुआत और 2-1 की जीत के बावजूद स्पेनिश क्लब कुल एग्रीगेट स्कोर में पीछे रह गया। पहले लेग में मिली 2-0 की हार आखिरकार निर्णायक साबित हुई और एटलेटिको मैड्रिड 3-2 के कुल स्कोर के साथ सेमीफाइनल में पहुंच गया।

यह एटलेटिको मैड्रिड की 2017 के बाद पहली चैंपियंस लीग सेमीफाइनल एंट्री है। टीम ने दबाव में संयम, रक्षात्मक मजबूती और सही समय पर गोल कर दिखाया कि बड़े मुकाबलों में अनुभव कितना मायने रखता है। अब अगले दौर में उसका सामना आर्सेनल या स्पोर्टिंग लिस्बन में से किसी एक से हो सकता है।

शुरुआती 24 मिनट में बार्सिलोना का दमदार प्रदर्शन
मैच की शुरुआत से ही बार्सिलोना ने आक्रामक रुख अपनाया। घरेलू दर्शकों के सामने टीम ने तेज पासिंग, विंग अटैक और हाई प्रेसिंग से एटलेटिको की डिफेंस लाइन को लगातार दबाव में रखा।

चौथे मिनट में ही बार्सिलोना को पहली सफलता मिल गई। युवा स्टार लेमिन यमल ने एटलेटिको के डिफेंडर की गलती का फायदा उठाते हुए शानदार गोल किया। इस गोल ने स्टेडियम का माहौल पूरी तरह बदल दिया और बार्सिलोना के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा दिया।

इसके बाद 24वें मिनट में फेरान टोरेस ने दानी ओल्मो के सटीक पास पर गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया। इस समय ऐसा लग रहा था कि बार्सिलोना मुकाबले पर पूरी तरह हावी है और सेमीफाइनल में पहुंचने की मजबूत दावेदार बन चुकी है।

लुकमैन के गोल ने बदला मैच का रुख
जब बार्सिलोना पूरी लय में दिख रही थी, तभी एटलेटिको मैड्रिड ने वापसी की। 31वें मिनट में मार्कोस लोरेंटे ने शानदार मूव बनाया और गेंद एडमोला लुकमैन तक पहुंचाई। लुकमैन ने मौके को भुनाते हुए अहम गोल दाग दिया।

यह गोल मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस गोल के बाद एग्रीगेट स्कोर का समीकरण बदल गया और बार्सिलोना पर दबाव बढ़ गया। एटलेटिको ने इसके बाद रक्षात्मक अनुशासन बनाए रखा और बार्सिलोना को खुलकर खेलने से रोका।

दूसरे हाफ में बार्सिलोना ने किए कई प्रयास
दूसरे हाफ में बार्सिलोना ने बराबरी और एग्रीगेट बढ़त हासिल करने के लिए लगातार हमले किए। टीम ने कई मौके बनाए, लेकिन फिनिशिंग में चूक और एटलेटिको की मजबूत डिफेंस उसके रास्ते में खड़ी रही।

फेरान टोरेस ने एक बार फिर गेंद जाल में पहुंचाई, लेकिन रेफरी ने इसे ऑफसाइड करार दिया। यह फैसला बार्सिलोना के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।

एटलेटिको के गोलकीपर ने भी कुछ शानदार बचाव किए, जिससे बार्सिलोना को तीसरा गोल नहीं मिल सका। मिडफील्ड में भी दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली।

कोच के फैसलों पर उठे सवाल
मैच के बाद बार्सिलोना के कोच हांसी फ्लिक की रणनीति चर्चा का विषय बनी रही। उन्होंने अनुभवी खिलाड़ियों रॉबर्ट लेवांडोव्स्की और मार्कस रैशफोर्ड को शुरुआती एकादश में शामिल नहीं किया।

फ्लिक ने युवा खिलाड़ियों और तेज अटैकिंग विकल्पों पर भरोसा जताया। शुरुआती मिनटों में यह फैसला सही साबित होता दिखा, लेकिन मैच के निर्णायक दौर में अनुभव की कमी साफ नजर आई।

विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े नॉकआउट मुकाबले में अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम के लिए फायदेमंद हो सकती थी।

रेड कार्ड ने बढ़ाई मुश्किल
मैच के अंतिम चरण में बार्सिलोना की मुश्किलें और बढ़ गईं। डिफेंडर एरिक गार्सिया को रेड कार्ड दिखाया गया। उन्होंने गोल की ओर बढ़ रहे एटलेटिको के खिलाड़ी को रोकने के लिए फाउल किया, जिसके बाद रेफरी ने उन्हें सीधे मैदान से बाहर भेज दिया।

10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही बार्सिलोना ने आखिरी मिनटों तक संघर्ष किया, लेकिन टीम जरूरी गोल नहीं कर सकी।

2015 के बाद से जारी है यूरोपीय खिताब का इंतजार
बार्सिलोना ने आखिरी बार 2015 में चैंपियंस लीग ट्रॉफी जीती थी। इसके बाद से क्लब कई बार नॉकआउट चरण में पहुंचा, लेकिन खिताब तक नहीं पहुंच सका।

इस हार के बाद भी टीम के प्रदर्शन में कुछ सकारात्मक संकेत दिखे। युवा खिलाड़ियों ने दबाव में अच्छा खेल दिखाया और टीम ने वापसी की मानसिकता भी दिखाई।

हार के बाद मिडफील्डर फ्रेंकी डी जोंग ने कहा कि टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। उनके मुताबिक, टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है और आने वाले सीजन में और मजबूत होकर लौटेगी।

एटलेटिको के लिए बड़ी उपलब्धि
एटलेटिको मैड्रिड के लिए यह जीत सिर्फ सेमीफाइनल में पहुंचने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्लब के आत्मविश्वास को भी मजबूत करेगी। टीम ने दिखाया कि बड़े मैचों में धैर्य, अनुशासन और मौके का सही इस्तेमाल जीत दिला सकता है।

अब सेमीफाइनल में एटलेटिको की नजर फाइ

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