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जमशेदपुर की बड़ी उपलब्धि, देश में पहली बार बना 22 कैरेट सोने का 3D प्रिंटिंग पाउडर

 जमशेदपुर
झारखंड के लौहनगरी जमशेदपुर के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है. सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल ) ने देश में पहली बार 22 कैरेट सोने का गोलाकार पाउडर तैयार करने में सफलता पाई है. यह पाउडर विशेष रूप से एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग ( थ्री डी प्रिंटिंग) के लिए विकसित किया गया है. उक्त बातें सीएसआईआर-एनएमएल के वैज्ञानिक डॉ. के. गोपाला ने शनिवार को साझा की. वे बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआई ऑडिटोरियम में इंजीनियर्स संस्था (भारत) जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. के. गोपाला ने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की सफलता पूरी तरह से कच्चे माल यानी मेटल पाउडर की गुणवत्ता पर टिकी होती है. एनएमएल की ‘विशेष गैस एटोमाइजर सुविधा’ का उपयोग कर तैयार किया गया 22 कैरेट सोने का यह पाउडर स्वदेशी तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है. इससे भविष्य में आभूषण निर्माण और अन्य जटिल तकनीकी क्षेत्रों में थ्री डी प्रिंटिंग के प्रयोग को एक नयी दिशा मिलेगी. इससे पूर्व कच्चे माल के संश्लेषण से उन्नत उत्पाद विकास एवं विशेषता निर्धारण विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मनोस डे (ऑफिस हेड, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स) और विशिष्ट अतिथि विनीत कुमार साह (चीफ लॉन्ग प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील एवं चेयरमैन, आईईआई) ने दीप प्रज्ज्वलित कर संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे प्रयोगशाला के नवाचारों को सीधे उद्योगों से जोड़कर भारत को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है.

लैब के रिसर्च का उपयोग फैक्ट्रियों में हो: मनोस डे
मुख्य अतिथि मनोस डे ने अपने संबोधन में कच्चे माल के विकास और उन्नत उत्पाद निर्माण के बीच समन्वय को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि लैब में होने वाले शोध तभी सार्थक हैं. जब वे कारखानों तक पहुंचे. उन्होंने इंजीनियरिंग क्षेत्र में लागत और ऊर्जा की बचत पर विशेष जोर देते हुए युवाओं को नयी तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया.
जटिल डिजाइनों के लिए थ्री डी प्रिंटिंग अनिवार्य: विनीत कुमार साह

संस्थान के चेयरमैन विनीत कुमार साह ने स्वागत भाषण में कहा कि वर्तमान समय में सटीक फिनिशिंग और जटिल ढांचों के निर्माण के लिए एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की मांग बढ़ी है. इस तकनीक के माध्यम से ऐसी ग्रेडेड सामग्री तैयार की जा सकती है. जो पारंपरिक निर्माण विधियों से संभव नहीं थी.

स्टील की आंतरिक संरचना पर शोध: डॉ. मोनालिसा मंडल
एनआईटी जमशेदपुर की डॉ. मोनालिसा मंडल ने एसएस 420 मार्टेंसिटिक स्टील पर अपना शोध प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि डीएमएलएस तकनीक से उत्पाद बनाते समय यदि मानकों को सही ढंग से नियंत्रित किया जाए, तो उत्पादों की मजबूती और उनकी सूक्ष्म संरचना को काफी बेहतर बनाया जा सकता है.

बढ़ेगा जंग के प्रति प्रतिरोध: कौशल किशोर
टाटा स्टील आरएंडडी के प्रिंसिपल रिसर्चर कौशल किशोर ने वायर आर्क एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर व्याख्यान दिया. उन्होंने 316 एल स्टेनलेस स्टील की सूक्ष्म संरचना में होने वाले बदलावों और उसके जंग प्रतिरोध पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी.

उच्च तापमान तकनीक और सिरेमिक उत्पाद: डॉ. राम कृष्ण
एनआईटी जमशेदपुर के डॉ. राम कृष्ण ने उच्च तापमान वाले वातावरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की. उन्होंने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सिरेमिक उत्पादों के विकास और उनके विशेषता निर्धारण की प्रक्रिया को समझाया. कार्यक्रम का संचालन जुस्को की सुकन्या दास ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस डी. भट्टाचार्जी ने किया. पूरे कार्यक्रम के सफल समन्वय में कृष्णेंदु शॉ की अहम भूमिका रही. संगोष्ठी के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए. विशेषज्ञों ने माना कि इस तरह के आयोजनों से इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच एक प्रभावी साझा मंच तैयार होता है.

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