राष्‍ट्रीय

सावरकर को भारत रत्न की मांग पर गरमाई सियासत, विपक्षी नेताओं ने किया पलटवार

नई दिल्ली 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की ओर से वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि मोहन भागवत कैसे बयान देते हैं, समझ में नहीं आ रहा है। राजद सांसद मनोज झा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "भारत रत्न का गौरव आज तक किसी के लिए प्रतीक्षा कर रहा है क्या? मुझे समझ नहीं आ रहा कि मोहन भागवत कैसे बयान देते हैं। विसंगतियों पर बात करिए, सरकार तो आप ही चला रहे हैं, बाकी सब तो कठपुतली हैं।" निर्दलीय सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कहा, "अभिव्यक्ति की आजादी है। कोई किसी के लिए भी पुरस्कार की मांग कर सकता है। मोहन भागवत तो सरकार के मालिक हैं। उन्हें मांग करने की क्या जरूरत है? वे कह देंगे तो कौन मना करेगा?"

उन्होंने कहा कि देश की आजादी में किसका कितना बड़ा योगदान है, यह किसी से छिपा नहीं है। हम लंबे समय से कांशीराम साहब को भारत रत्न दिए जाने की मांग कर रहे हैं। 1857 क्रांति के नायक कोतवाल धन सिंह गुर्जर के लिए भी हमने भारत रत्न की मांग की है, लेकिन ऐसे महापुरुषों को भारत रत्न न देकर सरकार इन वर्गों का अपमान कर रही है। यह हमारे लोग होने नहीं देंगे और वोट से इसका बदला लेंगे।"

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कहा, "बजट का जो हलवा बना था, वह ज्यादा किसे मिला? आज समय यह है कि 18 बड़ा है या शून्य? बजट पर चर्चा इसलिए होनी चाहिए क्योंकि अब किसान क्या करेगा? कभी भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था खोली थी और यह बताया गया था कि गरीब, किसान की तरक्की होगी, लेकिन जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो अमीर और अमीर और गरीब और गरीब हुआ है। उससे ज्यादा अर्थव्यवस्था आज खोल दी गई। ये सब बातें सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए की जा रही हैं।"

समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, "हमें लगातार देखने को मिला है कि जब से भाजपा आई है, सत्तापक्ष के कभी माइक ऑफ नहीं होते, लेकिन विपक्ष के नेताओं और सांसदों का माइक ऑफ किया जाता है। तो अगर अविश्वास प्रस्ताव लाना है तो इंडी गठबंधन मिलकर ही ये प्रस्ताव लाएगी।"

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